लद्दाख की कड़कड़ाती ठंड और दुर्गम पहाड़ियों के बीच गलवान घाटी में सोमवार रात को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई। भारतीय सेना ने कल देर रात आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि इस खूनी संघर्ष में एक कर्नल समेत भारत के 20 जवान शहीद हो गए हैं। पिछले चार दशकों से भी ज्यादा समय में सीमा पर यह सबसे बड़ी और घातक सैन्य झड़प है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।हैरानी की बात यह है कि इस पूरी झड़प के दौरान दोनों तरफ से एक भी गोली नहीं चली। रिपोर्ट के मुताबिक, जब भारतीय सेना एलएसी पर स्थिति का जायजा लेने गई थी, तब चीनी सैनिकों ने घात लगाकर नुकीले तारों, पत्थरों और लोहे की छड़ों से अचानक हमला कर दिया। संकरी पहाड़ियों पर यह संघर्ष कई घंटों तक चला। भारतीय जवानों ने भी इस कायराना हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में चीन के भी 40 से अधिक सैनिक हताहत हुए हैं, हालांकि बीजिंग ने अभी तक आधिकारिक संख्या नहीं बताई है।
देश में उपजे भारी आक्रोश के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कड़े शब्दों में संदेश देते हुए कहा, "मैं देश को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमारे जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। भारत शांति चाहता है, लेकिन अगर उकसाया गया तो हम हर हाल में यथोचित जवाब देने में सक्षम हैं।" रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ आपातकालीन बैठक कर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की।गलवान में हुए इस धोखे के बाद पूरे भारत में चीन के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है। कई शहरों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर चीनी झंडे जलाए और चीनी उत्पादों के बहिष्कार (Boycott China) की अपील की। भारतीय सेना ने सीमा पर अपनी मुस्तैदी और बढ़ा दी है और लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक सेना को 'हाई अलर्ट' पर रखा गया है।










