नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मौजूद सवा लाख दर्शकों की खामोशी और करोड़ों भारतीयों की नम आंखों के बीच कल रात क्रिकेट के नए विश्व विजेता का फैसला हुआ। पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहने वाली टीम इंडिया फाइनल की बाधा पार करने में नाकाम रही। ऑस्ट्रेलिया ने अपनी सटीक रणनीति और शानदार फील्डिंग के दम पर भारत को 6 विकेट से करारी शिकस्त दी और छठी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम के लिए शुरुआत अच्छी रही, लेकिन रोहित शर्मा (47) के आउट होते ही रनों की रफ्तार धीमी पड़ गई। विराट कोहली (54) और केएल राहुल (66) ने अर्धशतकीय पारियां जरूर खेलीं, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में भारतीय बल्लेबाजों को बाउंड्री के लिए तरसा दिया। पूरी टीम 50 ओवरों में मात्र 240 रन पर सिमट गई। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस का टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ।
ट्रेविस हेड: भारतीय गेंदबाजों के लिए बने 'काल'
241 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत भी खराब रही थी। मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह ने 47 रन पर ही 3 विकेट चटकाकर उम्मीदें जगा दी थीं। लेकिन इसके बाद ट्रेविस हेड (137) और मार्नस लाबुशेन (58*) के बीच हुई 192 रनों की साझेदारी ने भारत के हाथ से मैच छीन लिया। हेड ने अपनी पारी में 15 चौके और 4 छक्के जड़कर भारतीय स्पिन जोड़ी—कुलदीप और जडेजा—को पूरी तरह बेअसर कर दिया।
पूरे टूर्नामेंट में भारत का दबदबा, पर अंत निराशाजनक
भले ही भारत फाइनल हार गया, लेकिन इस वर्ल्ड कप को मोहम्मद शमी की घातक गेंदबाजी (24 विकेट) और विराट कोहली के ऐतिहासिक 50वें वनडे शतक के लिए याद रखा जाएगा। विराट कोहली को 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' चुना गया, जिन्होंने पूरे विश्व कप में रिकॉर्ड 765 रन बनाए। हालांकि, फाइनल की हार ने इन व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स की चमक को थोड़ा फीका कर दिया।









