देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार सुबह कुदरत ने एक बार फिर 2013 की यादें ताजा कर दीं। जोशीमठ के पास नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। पानी का सैलाब इतनी तेजी से आया कि किनारे पर मौजूद घर, पुल और दो बड़े पावर प्रोजेक्ट तिनके की तरह बह गए। इस त्रासदी में अब तक कई लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 150 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
बाढ़ का सबसे घातक असर तपोवन क्षेत्र में देखने को मिला। यहाँ निर्माणाधीन 'तपोवन-विष्णुगाड' जलविद्युत परियोजना के बांध और मशीनें पानी के साथ बह गईं। सबसे बड़ी चिंता तपोवन की मुख्य टनल को लेकर है, जो पूरी तरह मलबे और कीचड़ से भर गई है। बताया जा रहा है कि काम कर रहे करीब 30 से 35 मजदूर इस टनल के भीतर फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सेना, ITBP और NDRF की टीमें रात-दिन जुटी हुई हैं।
धौलीगंगा के ऊपर स्थित ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट इस आपदा की पहली भेंट चढ़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब 10:30 बजे पहाड़ से गरज के साथ धूल और पानी का गुबार उठा। देखते ही देखते नदियों का जलस्तर 15 से 20 फीट ऊपर उठ गया। रेणी गांव के पास बना बीआरओ का मुख्य पुल भी इस सैलाब में बह गया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों का संपर्क टूट गया है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और वायुसेना के अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के गंगा किनारे बसे जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने हर संभव मदद का भरोसा दिया है। राहत कार्य में तेजी लाने के लिए नौसेना के गोताखोरों और वायुसेना के हेलिकॉप्टरों को भी लगाया गया है।










