अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या, जेल सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

| By करन मल्होत्रा | Category: National News

अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या, जेल सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की राजस्थान की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर कथित तौर पर गला दबाकर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

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राजस्थान की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या ने पूरे प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के चंबल क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, जगन गुर्जर की जेल की बैरक के भीतर गला दबाकर हत्या की गई। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया वारदात में उसके साथ बैरक में बंद एक अन्य कैदी की भूमिका सामने आई है, हालांकि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच जारी है।

घटना सोमवार दोपहर उस समय हुई जब नियमित प्रक्रिया के तहत कैदी अपनी बैरकों में बंद थे। जेल कर्मचारियों ने जब बैरक खोली तो जगन गुर्जर अचेत अवस्था में मिला। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं तथा हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कौन था जगन गुर्जर?

धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र के भवतीपुरा गांव का रहने वाला जगन गुर्जर कभी चंबल के सबसे सक्रिय और चर्चित डकैतों में गिना जाता था। उसने वर्ष 1990 के दशक में अपराध की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे चंबल के बीहड़ों में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया। हत्या, डकैती, अपहरण, फिरौती और रंगदारी जैसे गंभीर अपराधों के कारण उसका नाम राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए लंबे समय तक चुनौती बना रहा।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ तीन राज्यों में 128 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। एक समय उस पर लाखों रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। चंबल क्षेत्र में उसका नाम भय का पर्याय माना जाता था और कई वर्षों तक वह पुलिस की पकड़ से बचता रहा।

कई बार गिरफ्तारी और जमानत

जगन गुर्जर पहली बार वर्ष 2001 में गिरफ्तार हुआ था, लेकिन बाद के वर्षों में वह कई मामलों में जमानत पर बाहर आता-जाता रहा। वर्ष 2008 में वह उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया, जब उस पर तत्कालीन राजस्थान मुख्यमंत्री के धौलपुर स्थित महल को उड़ाने की धमकी देने का आरोप लगा। इसके बाद भी वह कई गंभीर मामलों में पुलिस के रडार पर बना रहा। वर्ष 2022 में भी उसे एक अन्य आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया गया था।

अजमेर जेल में क्यों था बंद?

जगन गुर्जर को इस वर्ष मार्च में सुरक्षा कारणों से अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में स्थानांतरित किया गया था। यहां उसे कड़ी निगरानी में रखा गया था। बावजूद इसके जेल के भीतर उसकी हत्या हो जाना प्रशासन के लिए बड़ा सवाल बन गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हत्या केवल आपसी विवाद का परिणाम थी या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी।

हत्या के पीछे क्या वजह?

अजमेर पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में बैरक के भीतर कैदियों के बीच हुए विवाद के बाद हत्या की आशंका सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सह-कैदी ने पूछताछ में गमछे से गला दबाने की बात स्वीकार की है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हत्या के वास्तविक कारणों और किसी संभावित साजिश की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।

जेल प्रशासन पर उठे सवाल

हाई सिक्योरिटी जेल को राज्य की सबसे सुरक्षित जेलों में माना जाता है, जहां कुख्यात अपराधियों को रखा जाता है। ऐसे में बैरक के भीतर एक हाई-प्रोफाइल कैदी की हत्या ने जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि घटना के समय निगरानी व्यवस्था कैसी थी और क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल में कहीं चूक हुई।

परिजनों की मांग और आगे की कार्रवाई

घटना के बाद जगन गुर्जर के परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने मामले में उच्च स्तरीय जांच और जेल प्रशासन की भूमिका की भी पड़ताल करने की मांग उठाई है। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर संबंधित कैदी से पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि जेल अधिकारियों और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

चंबल के बीहड़ों में वर्षों तक आतंक का पर्याय रहे जगन गुर्जर की मौत ने एक दौर का अंत तो कर दिया, लेकिन उसकी हत्या ने जेल सुरक्षा, हाई-रिस्क कैदियों की निगरानी और कारागार व्यवस्था की कार्यप्रणाली को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और उसके निष्कर्षों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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