उत्तर प्रदेश की राजनीति में कल एक ऐसा भूचाल आया जिसने दशकों पुराने सारे समीकरणों को ध्वस्त कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और अमित शाह की रणनीति के दम पर भारतीय जनता पार्टी ने सूबे में 325 सीटों (सहयोगियों सहित) पर जीत दर्ज कर ऐतिहासिक 'क्लीन स्वीप' किया है। 403 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा ने अकेले 312 सीटें जीतकर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया है।मोदी लहर में उड़े 'यूपी के लड़के' चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन ने "यूपी के लड़के" (अखिलेश यादव और राहुल गांधी) के नारे के साथ जो उम्मीदें जगाई थीं, वे धराशायी हो गईं। सत्ताधारी समाजवादी पार्टी महज 47 सीटों पर सिमट गई, जबकि कांग्रेस को केवल 7 सीटों से संतोष करना पड़ा। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए नतीजे और भी चौंकाने वाले रहे, जहाँ मायावती की पार्टी सिर्फ 19 सीटें ही जीत सकी।विजय संबोधन और कार्यकर्ताओं का जोश जीत के बाद दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में जश्न का माहौल रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे "नए भारत के निर्माण का जनादेश" बताया। उन्होंने ट्वीट कर उत्तर प्रदेश की जनता का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह जीत विकास और सुशासन की जीत है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस परिणाम ने जातिवाद और परिवारवाद की राजनीति को पूरी तरह नकार दिया है।
अगला मुख्यमंत्री कौन? इतने बड़े बहुमत के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि लखनऊ की गद्दी पर कौन बैठेगा। चूंकि भाजपा ने बिना किसी मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ा था, इसलिए अब कई नामों (राजनाथ सिंह, केशव प्रसाद मौर्य, मनोज सिन्हा आदि) पर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में विधायक दल की बैठक में नए नेता का चुनाव कर लिया जाएगा।







