उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित जवाहर बाग में गुरुवार शाम को अवैध कब्जा हटाने गई पुलिस और एक स्वयंभू पंथ के अनुयायियों के बीच हुई भीषण हिंसा ने खूनी मोड़ ले लिया है। इस संघर्ष में मथुरा के पुलिस अधीक्षक (नगर) मुकुल द्विवेदी और संतोष यादव (थानाध्यक्ष, फरह) शहीद हो गए हैं। अब तक इस हिंसा में कुल 29 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।जवाहर बाग की करीब 270 एकड़ सरकारी जमीन पर 'आजाद भारत विधिक वैचारिक क्रांति सत्याग्रही' नाम के संगठन ने पिछले दो साल से अवैध कब्जा कर रखा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब पुलिस प्रशासन कब्जा छुड़ाने पहुँचा, तो बाग के अंदर बने झोपड़ों से उपद्रवियों ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग की और पेट्रोल बमों से हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
इस पूरे उपद्रव का मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव बताया जा रहा है, जिसने अपने समर्थकों को एक अर्धसैनिक बल की तरह प्रशिक्षित किया था। बाग के अंदर भारी मात्रा में असलाह, बारूद और गैस सिलेंडर जमा किए गए थे। संघर्ष के दौरान गैस सिलेंडरों में हुए धमाकों ने पूरी जगह को आग के हवाले कर दिया, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ गया।इस घटना ने खुफिया विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कैसे दो साल तक शहर के बीचों-बीच एक समानांतर सरकार चलती रही और प्रशासन को वहां जमा हथियारों की भनक नहीं लगी?फिलहाल मथुरा में तनावपूर्ण शांति है और भारी सुरक्षा बल तैनात है। मुख्यमंत्री ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और शहीदों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। पुलिस ने अब तक 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव की तलाश जारी है।







