हरियाणा में जाट आरक्षण की मांग एक बार फिर राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। ओबीसी (OBC) श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग को लेकर जाट समुदाय के विभिन्न संगठनों ने पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। इस आंदोलन ने न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है, बल्कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की राजनीतिक स्थिरता की भी परीक्षा ले रहा है। आंदोलन का सबसे गहरा असर रोहतक, झज्जर, सोनीपत और हिसार जैसे जिलों में देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे पटरियों को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे दिल्ली और चंडीगढ़ के बीच का संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रदर्शनों के कारण आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है और परिवहन सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ा है।
जाट समुदाय का तर्क है कि कृषि क्षेत्र में आ रही गिरावट और सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व की कमी के कारण उन्हें 'विशेष पिछड़ा वर्ग' में शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए कुछ फैसलों ने इस मांग की राह में कानूनी पेच फंसा दिए हैं। राज्य सरकार ने शांति की अपील करते हुए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का आश्वासन दिया है, लेकिन प्रदर्शनकारी अब किसी भी ठोस अधिसूचना से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं।







