राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हरियाणा के विभिन्न जिलों में स्थित ईंट-भट्टों में कथित बंधुआ मजदूरी से जुड़े 86 मामलों की ऑनलाइन सुनवाई की। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, श्रम आयुक्त विजयकुमार भाविकट्टी सहित सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और आयोग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि अधिकांश मामलों में संबंधित अधिकारियों द्वारा उपलब्ध अभिलेखों की पर्याप्त जांच नहीं की गई, जिसके कारण यह तय करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे कि संबंधित श्रमिक वास्तव में बंधुआ मजदूर हैं या नहीं।
न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे बंधुआ मजदूरों की पहचान, बचाव और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 14 मई 2026 को जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सख्ती से पालन करें। उन्होंने कहा कि जांच टीम का गठन निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाए ताकि मामलों की निष्पक्ष और प्रभावी जांच हो सके।
मजदूरों के लिए हेल्पलाइन शुरू करने की आवश्यकता
आयोग के अध्यक्ष ने श्रमिकों के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन शुरू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि यदि श्रमिकों के रोजगार का उचित रिकॉर्ड रखा जाए और उन्हें सहायता प्राप्त करने के लिए हेल्पलाइन उपलब्ध हो, तो बंधुआ मजदूरी जैसी घटनाओं का समय रहते पता लगाया जा सकेगा और पीड़ितों को शीघ्र राहत मिल सकेगी।
NHRC ने Advisory 2.0 के पालन पर दिया जोर
एनएचआरसी के संयुक्त सचिव समीर कुमार ने आयोग के निर्देशों और 'Advisory 2.0 to Identify, Release and Rehabilitate Bonded Labourers' का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक के दौरान जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा प्रस्तुत Action Taken Reports (ATR) की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
हरियाणा सरकार ने दिया पूर्ण सहयोग का आश्वासन
सुनवाई के दौरान हरियाणा के मुख्य सचिव और श्रम आयुक्त ने आयोग को आश्वस्त किया कि सभी 86 मामलों की दोबारा समीक्षा की जाएगी तथा आवश्यक जानकारी और विस्तृत रिपोर्ट जल्द आयोग को उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और लागू कानूनों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई हो सके।
बंधुआ मजदूरी आज भी देश के कई हिस्सों में गंभीर मानवाधिकार चुनौती बनी हुई है। एनएचआरसी की यह पहल न केवल मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि श्रमिकों के लिए हेल्पलाइन और रोजगार रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाएं भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम और पीड़ितों के पुनर्वास को भी मजबूत कर सकती हैं।










