उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए कई नई हथियार प्रणालियों का परीक्षण किया है। सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के अनुसार, 25 जून को हुए इन परीक्षणों की निगरानी स्वयं उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने की। इस दौरान लंबी दूरी की रॉकेट प्रणाली, सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल के लिए विशेष वारहेड और लंबी दूरी तक मार करने वाले तोपखाने के गोले का परीक्षण किया गया।
90 किलोमीटर तक मार करने वाला नया रॉकेट सिस्टम
परीक्षण में उत्तर कोरिया ने अपने उन्नत 240 मिमी 24-ट्यूब मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का प्रदर्शन किया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसकी मारक क्षमता बढ़ाकर 90 किलोमीटर कर दी गई है। इसमें स्वचालित संचालन और सटीक लक्ष्यभेदन (Precision Guidance) तकनीक भी जोड़ी गई है, जिससे यह दुश्मन के बड़े सैन्य ठिकानों पर अधिक प्रभावी हमला कर सकता है।
बैलिस्टिक मिसाइल के लिए नया वारहेड
उत्तर कोरिया ने सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए एक विशेष मिशन वारहेड का भी परीक्षण किया। सरकारी मीडिया के अनुसार यह वारहेड दुश्मन के हवाई अड्डों, बंदरगाहों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों जैसे रणनीतिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
155 मिमी हॉवित्जर की मारक क्षमता बढ़ी
इसके अलावा 155 मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड गन हॉवित्जर के लिए विकसित नए गोले का भी परीक्षण किया गया। उत्तर कोरिया का दावा है कि अब यह तोप 65 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को भेद सकती है, जो पारंपरिक तोपखाने की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी मानी जा रही है।
किम जोंग-उन का बयान
हथियार परीक्षण के बाद किम जोंग-उन ने वैज्ञानिकों और रक्षा अनुसंधान संस्थानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन परीक्षणों ने उत्तर कोरिया की रक्षा तकनीक में हुई प्रगति को साबित किया है। किम ने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में किसी भी देश की संप्रभुता और सुरक्षा केवल मजबूत सैन्य शक्ति के बल पर ही सुनिश्चित की जा सकती है।
बढ़ती परमाणु क्षमता पर नजर
उत्तर कोरिया लगातार अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमता का विस्तार कर रहा है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषण संस्थानों के अनुसार, देश के पास वर्तमान में लगभग 50 परमाणु वारहेड होने का अनुमान है और वह हर वर्ष अतिरिक्त वारहेड तैयार करने की क्षमता विकसित कर चुका है। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं है और अलग-अलग संस्थानों के अनुमान भिन्न हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य गतिविधियां पूर्वी एशिया में सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना सकती हैं। ऐसे परीक्षणों पर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।









