दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की विकास दर में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (National Bureau of Statistics of China-NBS) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में चीन की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 4.3 प्रतिशत रही। यह पहली तिमाही के 5.0 प्रतिशत की तुलना में 0.7 प्रतिशत अंक कम है और वर्ष 2022 के बाद सबसे कमजोर तिमाही वृद्धि मानी जा रही है।
NBS के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में चीन की अर्थव्यवस्था का कुल आकार 69.57 ट्रिलियन युआन (69,570.4 अरब युआन) रहा, जबकि केवल दूसरी तिमाही में GDP 36.15 ट्रिलियन युआन (36,151.1 अरब युआन) दर्ज की गई। पहली छमाही में समग्र आर्थिक वृद्धि 4.7 प्रतिशत रही, लेकिन दूसरी तिमाही में कमजोरी ने सरकार के पूरे वर्ष के विकास लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
NBS ने क्या कहा?
राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चीन की अर्थव्यवस्था "दबाव के बावजूद उचित दायरे में संचालित हुई" और नई प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों में वृद्धि जारी है। हालांकि ब्यूरो ने स्वीकार किया कि घरेलू मांग अभी भी कमजोर है तथा बाहरी अनिश्चितताओं और निवेश में गिरावट का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा है।
NBS के उप-आयुक्त ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि दूसरी तिमाही की धीमी वृद्धि मुख्य रूप से कुछ अल्पकालिक बाहरी कारकों और घरेलू औद्योगिक चुनौतियों का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक बुनियादी स्थिति अभी भी स्थिर बनी हुई है और नए विकास क्षेत्रों में तेजी जारी है।
किन क्षेत्रों का प्रदर्शन कैसा रहा?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दूसरी तिमाही में—
- सेवा क्षेत्र (Tertiary Sector) में 5.1% वृद्धि दर्ज की गई।
- प्राथमिक क्षेत्र (कृषि) की वृद्धि 3.7% रही।
- द्वितीयक क्षेत्र (उद्योग) की वृद्धि घटकर 3.0% रह गई।
- विनिर्माण (Manufacturing) में 4.8% की वृद्धि हुई।
- निर्माण (Construction) क्षेत्र में 4.1% की गिरावट दर्ज की गई।
- रियल एस्टेट क्षेत्र में 0.2% की कमी आई।
- इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी एवं सॉफ्टवेयर सेवाओं में 10.8% तथा लीजिंग एवं बिजनेस सेवाओं में 11.6% की मजबूत वृद्धि दर्ज हुई।
रियल एस्टेट और निवेश बने सबसे बड़ी चिंता
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters के अनुसार, चीन की आर्थिक सुस्ती का सबसे बड़ा कारण रियल एस्टेट क्षेत्र में लगातार गिरावट और कमजोर घरेलू मांग है। जनवरी-मई 2026 के दौरान फिक्स्ड एसेट निवेश में 4% से अधिक गिरावट दर्ज की गई, जबकि रियल एस्टेट निवेश लगभग 18% घट गया। यही वजह है कि बाजार की अपेक्षित 4.5% वृद्धि भी हासिल नहीं हो सकी।
विश्लेषकों का कहना है कि चीन का निर्यात अभी भी मजबूत बना हुआ है, लेकिन केवल निर्यात के सहारे घरेलू अर्थव्यवस्था को गति देना संभव नहीं होगा। उपभोक्ता खर्च और निजी निवेश में सुधार के बिना आर्थिक वृद्धि सीमित रह सकती है।
वैश्विक बाजारों पर पड़ा असर
चीन विश्व का सबसे बड़ा औद्योगिक उत्पादक और लौह अयस्क, तांबा, एल्यूमीनियम तथा कच्चे तेल का प्रमुख उपभोक्ता है। ऐसे में उसकी आर्थिक वृद्धि धीमी होने से वैश्विक कमोडिटी बाजारों पर दबाव बढ़ गया है। आर्थिक आंकड़े जारी होने के बाद एशियाई शेयर बाजारों में सतर्क कारोबार देखा गया, जबकि धातुओं और ऊर्जा से जुड़ी कई कमोडिटी की कीमतों में नरमी दर्ज की गई।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत के लिए यह स्थिति मिश्रित संकेत देती है। यदि चीन की मांग कमजोर रहती है तो कच्चे तेल और औद्योगिक धातुओं की कीमतों में नरमी बनी रह सकती है, जिससे भारत का आयात बिल कम हो सकता है और महंगाई पर दबाव घट सकता है। हालांकि दूसरी ओर, वैश्विक मांग कमजोर होने पर भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब निवेशकों की नजर जुलाई के अंत में होने वाली चीन की शीर्ष नीति-निर्धारण बैठक पर होगी, जहां उपभोग बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और रियल एस्टेट क्षेत्र को राहत देने के लिए नए आर्थिक पैकेज की घोषणा की जा सकती है। यदि ऐसे कदम प्रभावी नहीं रहे तो वर्ष 2026 में चीन के लिए 4.5–5% के वार्षिक वृद्धि लक्ष्य को हासिल करना कठिन हो सकता है।










