क्रिकेट के 'मक्का' कहे जाने वाले लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसे वर्षों तक याद रखा जाएगा। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारत ने एकमात्र टेस्ट मैच में इंग्लैंड को 270 रन के विशाल अंतर से हराकर पहली बार लॉर्ड्स में महिला टेस्ट जीतने का इतिहास रच दिया। यह लॉर्ड्स में खेला गया पहला महिला टेस्ट भी था और भारत ने इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार जीत में बदल दिया।
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने पहली पारी में 74.5 ओवर में 285 रन बनाए। सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने शानदार 83 रन की पारी खेली और टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 58 रन, जबकि दीप्ति शर्मा ने भी 57 रन का महत्वपूर्ण योगदान दिया। जेमिमा रोड्रिग्स ने 35 रन बनाए। इंग्लैंड की ओर से सोफी एक्लेस्टोन ने तीन विकेट, लॉरेन फाइलर ने दो और इज़ी वोंग ने दो विकेट हासिल किए।
पहली पारी में जवाब देने उतरी इंग्लैंड की बल्लेबाजी भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी। पूरी टीम 59.1 ओवर में केवल 170 रन पर सिमट गई। एमी जोन्स ने सर्वाधिक 52 रन बनाए, जबकि नेट साइवर-ब्रंट ने 44 और माया बाउशियर ने 23 रन जोड़े। भारतीय तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 5 विकेट लेकर इतिहास रच दिया। वह लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर नाम दर्ज कराने वाली पहली महिला गेंदबाज बनीं। स्नेह राणा ने दो विकेट लेकर उनका बेहतरीन साथ निभाया। पहली पारी के आधार पर भारत को 115 रन की महत्वपूर्ण बढ़त मिली।
दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाजों ने इंग्लैंड के गेंदबाजों पर पूरी तरह दबाव बना दिया। इस बार सबसे बड़ी नायिका बनीं विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया, जिन्होंने 113 रन की ऐतिहासिक शतकीय पारी खेली। वह लॉर्ड्स में महिला टेस्ट क्रिकेट का पहला शतक लगाने वाली बल्लेबाज भी बनीं। स्मृति मंधाना ने दूसरी पारी में भी 70 रन बनाए, जबकि ऋचा घोष ने नाबाद 50 रन की तेजतर्रार पारी खेली। शेफाली वर्मा ने 33 रन जोड़े। भारत ने 86.3 ओवर में 341/7 पर पारी घोषित कर इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 457 रन का असंभव सा लक्ष्य रखा। इंग्लैंड की ओर से सोफी एक्लेस्टोन ने दूसरी पारी में पांच विकेट झटके।
457 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर मेजबान टीम को कभी संभलने नहीं दिया। अंतिम दिन सोफी एक्लेस्टोन ने 50 रन बनाकर संघर्ष जरूर किया, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। इंग्लैंड की पूरी टीम 62.5 ओवर में 186 रन पर ढेर हो गई और भारत ने मुकाबला 270 रन से अपने नाम कर लिया।
दूसरी पारी में स्नेह राणा ने चार विकेट लेकर इंग्लैंड की कमर तोड़ दी, जबकि दीप्ति शर्मा ने दो विकेट हासिल किए। पूरी गेंदबाजी इकाई ने अनुशासित प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया। क्रांति गौड़ ने पूरे मैच में सात विकेट लेकर अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया और भारत की जीत की सबसे बड़ी नायिकाओं में शामिल रहीं।
भारतीय टीम की जीत की सबसे बड़ी खासियत उसका सामूहिक प्रदर्शन रहा। पहली पारी में स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने बल्लेबाजी संभाली, जबकि दूसरी पारी में यास्तिका भाटिया के ऐतिहासिक शतक और ऋचा घोष की तेज अर्धशतकीय पारी ने इंग्लैंड को मुकाबले से पूरी तरह बाहर कर दिया। गेंदबाजी में क्रांति गौड़, स्नेह राणा और दीप्ति शर्मा ने लगातार दबाव बनाए रखा और इंग्लैंड को कोई बड़ी साझेदारी बनाने का अवसर नहीं दिया।
यह जीत केवल एक टेस्ट मैच की जीत नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के बढ़ते वर्चस्व का प्रतीक है। लॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित मैदान पर पहली बार महिला टेस्ट खेला गया और उसी मुकाबले में भारत ने मेजबान इंग्लैंड को एकतरफा अंदाज में पराजित कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा दिया। यास्तिका भाटिया का ऐतिहासिक शतक, क्रांति गौड़ का पांच विकेट का कारनामा और पूरी टीम का शानदार प्रदर्शन इस मैच को भारतीय महिला क्रिकेट के सबसे यादगार पलों में शामिल कर गया।








