दुनिया के चार ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों में सबसे पुराना और प्रतिष्ठित विंबलडन हर साल इंग्लैंड के लंदन स्थित ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस एंड क्रोकेट क्लब में आयोजित किया जाता है। वर्ष 1877 में शुरू हुआ यह टूर्नामेंट अपनी समृद्ध परंपराओं, घास (Grass) के कोर्ट, खिलाड़ियों के सफेद परिधान (All White Dress Code) और शाही माहौल के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। हर साल लाखों दर्शक और करोड़ों टीवी दर्शक इस टूर्नामेंट का इंतजार करते हैं। लेकिन विंबलडन की पहचान सिर्फ उसके स्टार खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां इस्तेमाल होने वाली हर छोटी पीली टेनिस बॉल भी उतनी ही खास होती है।
120 साल से भी पुराना साथ
विंबलडन में आधिकारिक तौर पर Slazenger कंपनी की टेनिस गेंदों का इस्तेमाल किया जाता है। यह साझेदारी 1902 से लगातार चली आ रही है और इसे खेल इतिहास की सबसे लंबी चलने वाली आधिकारिक साझेदारियों में गिना जाता है। कंपनी हर साल विंबलडन के लिए विशेष मानकों के अनुरूप गेंदें तैयार करती है ताकि टूर्नामेंट के हर मैच में खिलाड़ियों को समान गुणवत्ता और प्रदर्शन मिल सके।
पूरे टूर्नामेंट में कितनी गेंदें इस्तेमाल होती हैं?
विंबलडन जैसे दो सप्ताह लंबे ग्रैंड स्लैम में करीब 55,000 से 60,000 टेनिस गेंदों का उपयोग होता है। मुख्य ड्रॉ, क्वालीफाइंग मुकाबलों और अभ्यास सत्रों को मिलाकर हर दिन हजारों गेंदें कोर्ट पर पहुंचती हैं। इतनी बड़ी संख्या इसलिए जरूरी होती है ताकि हर मैच में गेंदों की गुणवत्ता एक जैसी बनी रहे।
आखिर गेंदें इतनी जल्दी क्यों बदली जाती हैं?
विंबलडन में मैच शुरू होने के बाद पहली बार 7 गेम पूरे होने पर गेंद बदली जाती है। इसके बाद हर 9 गेम के अंतराल पर नई गेंदें खिलाड़ियों को दी जाती हैं।
दरअसल, तेज सर्विस, स्मैश और लगातार रैलियों के दौरान गेंद की सतह घिसने लगती है और उसके भीतर का दबाव भी धीरे-धीरे बदलता है। इससे गेंद की गति और उछाल प्रभावित होती है। नई गेंद ज्यादा तेज और अधिक उछाल वाली होती है, जबकि कुछ गेम बाद वही गेंद अपेक्षाकृत धीमी हो जाती है। यही कारण है कि कई खिलाड़ी नई गेंद मिलने पर अधिक आक्रामक रणनीति अपनाते हैं।
कैसे बनती है विंबलडन की गेंद?
एक विंबलडन टेनिस बॉल का निर्माण कई चरणों में होता है। सबसे पहले उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक और सिंथेटिक रबर से उसका ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद उसमें निर्धारित दबाव वाली हवा भरी जाती है और बाहर विशेष ऊनी तथा नायलॉन मिश्रित फेल्ट की परत चढ़ाई जाती है।
घास के कोर्ट पर गेंद का प्रदर्शन अन्य सतहों से अलग होता है, इसलिए विंबलडन में इस्तेमाल होने वाली गेंदों का फेल्ट भी विशेष रूप से तैयार किया जाता है। तैयार होने के बाद हर गेंद वजन, आकार, दबाव और उछाल जैसे कई गुणवत्ता परीक्षणों से गुजरती है।
आधिकारिक मानक क्या हैं?
अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ (ITF) के नियमों के अनुसार आधिकारिक टेनिस गेंद का वजन 56.0 से 59.4 ग्राम और व्यास 6.54 से 6.86 सेंटीमीटर होना चाहिए। इसका रंग ऑप्टिक येलो (Optic Yellow) होता है, जिसे टेलीविजन प्रसारण और खिलाड़ियों की दृश्यता को ध्यान में रखकर अपनाया गया था।
नई और पुरानी गेंद में क्या फर्क महसूस करते हैं खिलाड़ी?
नई गेंद अधिक तेज गति से चलती है और उसकी उछाल भी ज्यादा होती है। इससे सर्विस और आक्रामक शॉट अधिक प्रभावी बनते हैं। वहीं कुछ गेम बाद गेंद का फेल्ट फूल जाता है, जिससे हवा का प्रतिरोध बढ़ता है और गेंद थोड़ी धीमी हो जाती है। ऐसे में लंबे रैलियों और रणनीतिक खेल का महत्व बढ़ जाता है।
टूर्नामेंट के बाद इन गेंदों का क्या होता है?
विंबलडन में इस्तेमाल की गई अधिकांश गेंदों को फेंका नहीं जाता। टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद इन्हें चैरिटी संस्थाओं, स्थानीय टेनिस क्लबों और प्रशिक्षण केंद्रों को उपलब्ध कराया जाता है। बड़ी संख्या में गेंदें प्रशंसकों और संग्रहकर्ताओं को स्मृति-चिह्न के रूप में भी बेची जाती हैं। कुछ गेंदों का उपयोग वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों में भी किया जाता है।
रोचक तथ्य
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विंबलडन दुनिया का सबसे पुराना ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट है।
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Slazenger पिछले 120 वर्ष से अधिक समय से इसकी आधिकारिक गेंद निर्माता है।
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टूर्नामेंट के दौरान गेंदों को नियंत्रित तापमान वाले विशेष स्टोरेज में रखा जाता है ताकि उनका दबाव और प्रदर्शन एक समान बना रहे।
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एक मैच में गेंद कई बार बदली जाती है और नई गेंद आने के बाद मैच की गति व खिलाड़ियों की रणनीति में भी बदलाव देखा जाता है।
विंबलडन की विरासत सिर्फ उसके ऐतिहासिक रिकॉर्ड, दिग्गज खिलाड़ियों और प्रतिष्ठित ट्रॉफियों तक सीमित नहीं है। इस टूर्नामेंट की हर टेनिस बॉल भी उस उत्कृष्टता, परंपरा और वैज्ञानिक तैयारी का प्रतीक है जिसने विंबलडन को दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट बनाया है।








