वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों ने संक्रामक रोगों की निगरानी को लेकर नई रिपोर्टें जारी, देशों को सतर्क रहने की सलाह

| By कुनाल देशमुख | Category: International news

वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों ने संक्रामक रोगों की निगरानी को लेकर नई रिपोर्टें जारी, देशों को सतर्क रहने की सलाह

विश्व की प्रमुख स्वास्थ्य एजेंसियों ने संक्रामक रोगों के बढ़ते जोखिम को देखते हुए नई निगरानी रिपोर्टें जारी की हैं। रिपोर्टों में इबोला, निपाह वायरस, डेंगू, एमपॉक्स, हैजा, एवियन इन्फ्लुएंजा और अन्य उभरते संक्रमणों पर विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय यात्रा, शहरीकरण और मानव-पशु संपर्क में वृद्धि के कारण भविष्य में संक्रामक रोगों के प्रकोप की आशंका बढ़ सकती है। ऐसे में सभी देशों को अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, निगरानी नेटवर्क और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

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वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर बढ़ती चिंता

कोविड-19 महामारी के बाद पूरी दुनिया में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ी है। महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी एक देश में उत्पन्न होने वाला संक्रामक रोग कुछ ही दिनों में पूरी दुनिया के लिए चुनौती बन सकता है। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC), अफ्रीका CDC तथा अन्य क्षेत्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां नियमित रूप से संक्रामक रोगों की निगरानी कर रही हैं।

हाल ही में जारी रिपोर्टों में कई ऐसे संक्रमणों का उल्लेख किया गया है जिन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष नजर रखी जा रही है। इन रिपोर्टों का उद्देश्य सदस्य देशों को समय रहते सतर्क करना, संभावित जोखिमों का आकलन करना तथा रोग नियंत्रण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश उपलब्ध कराना है।

किन रोगों पर सबसे अधिक चिंता

नई रिपोर्टों में जिन संक्रामक रोगों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, उनमें इबोला, निपाह वायरस, डेंगू, एमपॉक्स, हैजा, वेस्ट नाइल वायरस, एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) और क्राइमियन-कांगो हेमरेजिक फीवर प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार इनमें से कई रोग सीमित क्षेत्रों तक ही दिखाई देते हैं, लेकिन वैश्विक यात्रा और व्यापार के कारण इनके अन्य देशों तक फैलने की संभावना बनी रहती है। इसलिए किसी भी नए संक्रमण की शीघ्र पहचान और तत्काल रिपोर्टिंग बेहद आवश्यक मानी जा रही है।

इबोला पर लगातार नजर

अफ्रीकी देशों में इबोला संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। यह रोग अत्यधिक घातक माना जाता है और समय पर उपचार न मिलने पर मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता और संक्रमित व्यक्तियों तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों के कारण संक्रमण नियंत्रण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन और राहत एजेंसियां संयुक्त रूप से निगरानी और टीकाकरण अभियान चला रही हैं।

निपाह वायरस को लेकर सतर्कता

दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के केरल राज्य में सामने आए निपाह वायरस के मामलों के बाद WHO ने भी निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है। निपाह वायरस चमगादड़ों से जुड़ा एक जूनोटिक संक्रमण माना जाता है, जो संक्रमित पशुओं या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी फैल सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य विभाग संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की लगातार निगरानी कर रहा है। फिलहाल बड़े पैमाने पर संक्रमण फैलने के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी जारी रखी गई है।

डेंगू और मच्छर जनित रोगों का बढ़ता खतरा

दुनिया के अनेक देशों में डेंगू के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और अनियमित वर्षा मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं।

स्वास्थ्य एजेंसियों ने देशों से अपील की है कि वे मच्छर नियंत्रण कार्यक्रमों को मजबूत करें, जलभराव रोकें और लोगों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए जागरूक करें। कई देशों में डेंगू अब मौसमी समस्या न रहकर पूरे वर्ष चिंता का विषय बनता जा रहा है।

एमपॉक्स और अन्य उभरते संक्रमण

एमपॉक्स (पूर्व में मंकीपॉक्स) के मामलों पर भी वैश्विक स्तर पर नजर रखी जा रही है। हालांकि अधिकांश देशों में इसकी स्थिति नियंत्रण में है, फिर भी स्वास्थ्य एजेंसियों ने निगरानी जारी रखने की सलाह दी है।

इसी प्रकार हैजा, वेस्ट नाइल वायरस तथा एवियन इन्फ्लुएंजा जैसे संक्रमणों को लेकर भी विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग स्तर पर निगरानी जारी है। इन रोगों के प्रसार को रोकने के लिए त्वरित जांच, प्रयोगशाला क्षमता और सीमा पार सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

क्यों बढ़ रहा है संक्रमण का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार संक्रामक रोगों के बढ़ते जोखिम के पीछे कई कारण हैं। इनमें जलवायु परिवर्तन, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, जंगलों का कटाव, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में हस्तक्षेप, अंतरराष्ट्रीय यात्रा, वैश्विक व्यापार और जनसंख्या घनत्व प्रमुख हैं।

इन परिस्थितियों में नए रोगजनकों के मनुष्यों तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियां "वन हेल्थ" (One Health) दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दे रही हैं, जिसमें मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना जाता है।

मजबूत निगरानी प्रणाली की आवश्यकता

रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी संक्रामक रोग से प्रभावी ढंग से निपटने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका समय पर पहचान और निगरानी है। यदि प्रारंभिक स्तर पर संक्रमण का पता चल जाए तो उसके व्यापक प्रसार को रोका जा सकता है।

इसके लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, डिजिटल निगरानी प्रणाली, जीनोमिक सीक्वेंसिंग, संपर्क अनुरेखण (Contact Tracing) तथा स्थानीय स्तर पर सक्रिय स्वास्थ्य नेटवर्क की आवश्यकता बताई गई है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रामक रोग सीमाओं को नहीं मानते। इसलिए किसी भी देश में उत्पन्न स्वास्थ्य संकट पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि WHO और अन्य एजेंसियां देशों के बीच सूचना साझा करने, संयुक्त अनुसंधान, टीका विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य संसाधनों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर बल दे रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक सहयोग जितना मजबूत होगा, भविष्य की महामारियों का जोखिम उतना ही कम किया जा सकेगा।

नई वैश्विक स्वास्थ्य रिपोर्टें यह संकेत देती हैं कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया पहले की तुलना में अधिक सतर्क अवश्य हुई है, लेकिन संक्रामक रोगों का खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इबोला, निपाह, डेंगू, एमपॉक्स और अन्य संक्रमणों की निरंतर निगरानी आवश्यक बनी हुई है। स्वास्थ्य एजेंसियों का मानना है कि मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, आधुनिक निगरानी प्रणाली, वैज्ञानिक अनुसंधान, समय पर सूचना साझा करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही भविष्य में संभावित महामारियों से प्रभावी ढंग से निपटने का सबसे सशक्त माध्यम साबित होगा।

 

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