भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वां G20 शिखर सम्मेलन रविवार को सफलता के एक नए कीर्तिमान के साथ संपन्न हुआ। नई दिल्ली के अत्याधुनिक 'भारत मंडपम' में दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं के जमावड़े ने न केवल वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की, बल्कि भारत के नेतृत्व में एक साझा भविष्य का रोडमैप भी तैयार किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" (Vasudhaiva Kutumbakam) के मंत्र के साथ वैश्विक कूटनीति की एक नई परिभाषा लिखी।
दिल्ली घोषणापत्र: कूटनीति की बड़ी जीत
सम्मेलन के पहले ही दिन भारत ने 'नई दिल्ली घोषणापत्र' पर आम सहमति बनाकर दुनिया को चौंका दिया। यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस-चीन और पश्चिमी देशों के बीच गहरे मतभेदों के बावजूद, भारत ने एक ऐसा मध्य मार्ग निकाला जिसे सभी देशों ने स्वीकार किया। इसे भारत की विदेश नीति की एक बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है, जिसने वैश्विक मंच पर भारत की "ब्रिज-बिल्डर" (सेतु निर्माता) की छवि को पुख्ता किया है।
वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत भूमिका
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भारत की पहल पर अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाया गया। इससे भारत "ग्लोबल साउथ" (विकासशील देशों) के निर्विवाद नेता के रूप में उभरा है।
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वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (Global Biofuel Alliance) की शुरुआत कर भारत ने जलवायु परिवर्तन की जंग में दुनिया को नया विकल्प दिया।
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भारत ने अपने 'UPI' और 'आधार' जैसे डिजिटल मॉडल को दुनिया के सामने पेश किया, जिसे कई देशों ने अपनाने में रुचि दिखाई।
IMEC: व्यापार का नया गलियारा
शिखर सम्मेलन के इतर भारत, अमेरिका, सऊदी अरब और यूरोपीय संघ ने मिलकर 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' की घोषणा की। यह गलियारा न केवल व्यापार को गति देगा, बल्कि इसे चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने समापन सत्र में ब्राजील को अगले वर्ष की अध्यक्षता के लिए 'गैवल' (हथौड़ा) सौंपते हुए कहा कि "भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान जो बीज बोए हैं, वे दुनिया में विश्वास और सहयोग का वटवृक्ष बनेंगे।"








