देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। जुलाई के मध्य में मानसून की रफ्तार तेज होने से पूर्वी, मध्य, उत्तर और पश्चिमी भारत के कई राज्यों में लगातार बारिश का दौर जारी है। कई स्थानों पर नदियां उफान पर हैं, निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है और पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले एक सप्ताह तक देश के अनेक हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है।
पूर्वी भारत इस समय मानसूनी गतिविधियों का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण लगातार तेज बारिश दर्ज की जा रही है। कई जिलों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जबकि निचले इलाकों में पानी भरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से ओडिशा और गंगा के मैदानी क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा की चेतावनी जारी की गई है।
पूर्वोत्तर भारत भी लगातार बारिश की चपेट में है। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम में कई दिनों से जारी वर्षा के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है और प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस क्षेत्र में अगले कुछ दिनों तक मानसून की सक्रियता बनी रहेगी।
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी लगातार वर्षा ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं। पहाड़ी सड़कों पर मलबा आने, भूस्खलन और चट्टानें गिरने की घटनाओं के कारण कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है। चारधाम यात्रा मार्गों पर भी प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है। जम्मू-कश्मीर में मौसम विभाग ने पूरे सप्ताह बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात के कई हिस्सों में भी मानसून सक्रिय है। कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जबकि कई शहरों में जलभराव की स्थिति देखी गई। दूसरी ओर, पश्चिमी तटीय राज्यों—महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और केरल—में भी अरब सागर से आने वाली नमी के कारण लगातार अच्छी वर्षा हो रही है। इससे खरीफ फसलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं, हालांकि कुछ स्थानों पर शहरी बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हुई है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में व्यापक बारिश नहीं हुई है, लेकिन बादल छाए रहने, हल्की से मध्यम वर्षा और उमस भरे मौसम का सिलसिला जारी है। वहीं पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है।
लगातार हो रही बारिश का असर केवल परिवहन और जनजीवन तक सीमित नहीं है। कई राज्यों में रेल और सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। नदियों के किनारे बसे इलाकों में प्रशासन निगरानी बढ़ा रहा है तथा आवश्यक होने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखी गई है। राहत एजेंसियां, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं।
कृषि क्षेत्र के लिए मानसून का यह चरण मिश्रित तस्वीर पेश कर रहा है। धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त वर्षा लाभकारी मानी जा रही है, लेकिन जिन क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश हो रही है वहां खेतों में जलभराव से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने और स्थानीय कृषि विभाग के निर्देशों का पालन करने की सलाह दे रहे हैं।
अगले एक सप्ताह का मौसम कैसा रहेगा?
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक मानसून सक्रिय बना रहेगा। पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर राज्यों, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना है। इसके अलावा मध्य भारत और पश्चिमी तट के कई हिस्सों में भी तेज बारिश जारी रह सकती है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की यह सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। ऐसे में संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखने, अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। आने वाला सप्ताह देश के कई हिस्सों में राहत से अधिक सतर्कता का रहने वाला है, क्योंकि मानसून फिलहाल कमजोर पड़ने के संकेत नहीं दे रहा है।











