फ़्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-ले-बैं (Évian-les-Bains) में इस समय दुनिया की सात सबसे बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं का 52वां G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) पूरे चरम पर है। 15 जून से 17 जून 2026 तक चलने वाले इस सम्मेलन की मेजबानी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन कर रहे हैं। इस बैठक की सबसे बड़ी झलक हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शेयर की गई एक तस्वीर (जिसे आप image.png में देख सकते हैं) से मिलती है, जिसमें वे दुनिया के दिग्गज नेताओं के साथ एवियन के खूबसूरत बैकग्राउंड में खड़े नजर आ रहे हैं।
इस बार का समिट न सिर्फ आर्थिक नीतियों के लिहाज से बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी काफी अहम मोड़ पर हो रहा है। आइए जानते हैं कि इस समय फ़्रांस की धरती पर किन बड़े मुद्दों पर दुनिया के देशों के बीच गहन मंथन चल रहा है:
1. वैश्विक कर्ज संकट और आर्थिक अस्थिरता पर बड़ा फैसला
सम्मेलन के दूसरे दिन G7 नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर दुनिया के सामने मंडरा रहे सबसे बड़े खतरे—'बढ़ते वैश्विक कर्ज' (Global Debt Vulnerability)—पर गहरी चिंता जताई है। नेताओं ने साफ किया कि यह कर्ज संकट न केवल आर्थिक स्थिरता को खतरे में डाल रहा है, बल्कि विकासशील देशों में जरूरी सार्वजनिक सेवाओं के बजट को भी रोक रहा है। इसके समाधान के लिए वैश्विक स्तर पर नए रिस्क-शेयरिंग टूल्स और मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंकों को बढ़ावा देने की बात कही गई है
2. यूक्रेन युद्ध और रूस पर प्रतिबंधों की वापसी
यूक्रेन में पिछले चार साल से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मंच से रूस पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। ट्रंप ने साफ तौर पर कहा है कि अमेरिका जल्द ही रूसी तेल पर दोबारा कड़े प्रतिबंध लगाने जा रहा है ताकि मॉस्को पर 'डील' (समझौता) करने के लिए दबाव बनाया जा सके।
3. फ़्रांस की मेजबानी के 6 मुख्य एजेंडे
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के नेतृत्व में फ़्रांस ने इस साल छह प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया है:
• संतुलित आर्थिक विकास: बाजार में चल रही अस्थिरता और औद्योगिक ओवरकैपेसिटी को कम करना।
• अंतरराष्ट्रीय एकजुटता: विकासशील देशों के साथ अधिक न्यायसंगत और प्रभावी साझेदारी बनाना।
• क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षा: डिजिटल तकनीक और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए जरूरी दुर्लभ खनिजों की सप्लाई चेन में किसी एक देश (जैसे चीन) के दबदबे को कम करना और नए विकल्प ढूंढना।
• बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा: सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए कड़े नियम बनाना।
• नशीली दवाओं की तस्करी पर लगाम: वैश्विक संगठित अपराध और ड्रग ट्रैफिकिंग के नेटवर्क को तोड़ना।
• कैंसर के खिलाफ वैश्विक जंग: G7 के इतिहास में पहली बार कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने और रिसर्च डेटा साझा करने पर विशेष फोकस किया गया है
4. भारत की मजबूत उपस्थिति और 'ग्लोबल साउथ' की आवाज
भले ही भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन फ़्रांस के विशेष आमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। पीएम मोदी ने समिट की शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि वे यहाँ 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील और गरीब देशों) की आकांक्षाओं और चुनौतियों को मजबूती से उठाने आए हैं। समिट के इतर पीएम मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी काफी चर्चा में है।









