एडीजी बरेली जोन रमित शर्मा ने जोन के समस्त डिजिटल वॉलंटियर नेटवर्क का डिजिटल ऑडिट शुरू किया है। इसके लिए जोन के नौ जनपदों में चार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक साथ 36 गूगल फॉर्म सर्वेक्षण वितरित किए गए हैं।
एडीजी रमित शर्मा ने एनडीडी से बातचीत में कहा, “हमें लगता है कि डिजिटल वॉलंटियर नेटवर्क की क्षमता को और बेहतर बनाना जरूरी है। निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हमें सक्रिय और प्रतिबद्ध वॉलंटियर्स के दृष्टिकोण, अनुभव और सुझाव जानने होंगे। हम इस पहल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए गहन अध्ययन करेंगे।”
यह सर्वेक्षण डिजिटल वॉलंटियर पहल के दस वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस माह आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बरेली जोन में नामांकित 82,000 से अधिक डिजिटल वॉलंटियर्स में से वास्तव में कितने सक्रिय हैं और उनकी डिजिटल पहुंच की प्रकृति क्या है, यह पता लगाना है।
सर्वेक्षण की संरचना
नौ जनपद। चार प्लेटफॉर्म — एक्स (ट्विटर), फेसबुक आधिकारिक पेज, फेसबुक आधिकारिक अकाउंट और इंस्टाग्राम। प्रत्येक जनपद के लिए प्रत्येक प्लेटफॉर्म पर एक समर्पित गूगल फॉर्म। कुल 36 फॉर्म — प्रत्येक संबंधित जनपद के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से वितरित।
प्रत्येक जनपद-विशिष्ट फॉर्म में ड्रॉपडाउन मेनू है जिसमें उस जनपद के सभी थाने सूचीबद्ध हैं — जिससे सर्वेक्षण को बरेली जोन के नौ जनपदों (बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, संभल और बिजनौर) के समस्त 182 थानों तक थाना-स्तरीय विस्तार मिला है।
फॉर्म में क्या पूछा गया है
तीन खंड। पहला खंड पहचान स्थापित करता है — नाम, वॉलंटियर स्थिति और थाना।
दूसरा खंड सोशल मीडिया उपस्थिति की जांच करता है — वॉलंटियर का एक्स हैंडल, वॉलंटियर द्वारा कितनी बार पोस्ट किया जा रहा है (कभी नहीं से लेकर “प्रतिदिन या दिन में कई बार” तक), फॉलोअर्स की संख्या और क्या वे अपने जनपद पुलिस के आधिकारिक एक्स हैंडल को फॉलो करते हैं।
फॉलोअर्स संख्या का प्रश्न विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वॉलंटियर्स से पांच श्रेणियों में से एक चुनने को कहा गया है — 1,000 से कम, 1,000 से 10,000, 10,000 से 1,00,000, 1,00,000 से 10,00,000 और 10,00,000 से अधिक। ये श्रेणियां नैनो, माइक्रो, मैक्रो और मेगा इन्फ्लुएंसर की स्थापित वर्गीकरण व्यवस्था से सटीक रूप से मेल खाती हैं।
तीसरा खंड कार्यक्रम को बेहतर बनाने के लिए खुले सुझाव आमंत्रित करता है।
एक दशक जिसने यह आवश्यक बनाया
डिजिटल वॉलंटियर पहल की शुरुआत 2015 में तत्कालीन डीआईजी मेरठ रेंज रमित शर्मा ने की थी, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की पहली सोशल मीडिया लैब भी स्थापित की थी। 2016 में इसे राज्यव्यापी रूप से अपनाया गया और यह उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में तेजी से फैला।
2025 तक बरेली जोन में अकेले 82,000 से अधिक वॉलंटियर्स नामांकित थे। लेकिन ऐसा संभव ही की दस वर्ष की वृद्धि के साथ कुछ वॉलंटियर निष्क्रिय हो गए हो। मार्च 2025 का यह सर्वेक्षण इस स्थिति को मापने और कार्यक्रम को और बेहतर बनाने की दिशा में काम करेगा।
आगे क्या
सर्वेक्षण फॉर्म भरने वाले उत्तरदाताओं की जांच बरेली जोनल कार्यालय की सोशल मीडिया टीम करेगी। सक्रिय वॉलंटियर्स का विवरण सत्यापित करने के बाद टेलीफोनिक साक्षात्कार लिया जाएगा। जोनल टीम के सदस्यों ने एनडीडी को बताया कि प्रत्येक प्रतिक्रिया की मैन्युअल जांच के बाद टेलीफोनिक फॉलो-अप किया जाएगा — यह प्रक्रिया पांच महीने के अंदर पूरी करने की उम्मीद है। चयनित वॉलंटियर्स को बाद में इसी वर्ष एक भौतिक बैठक के लिए आमंत्रित किया जाएगा। बैठक की तिथि और स्थान की घोषणा अभी नहीं की गई है।





