अगस्त 2011 के मध्य में उत्तराखंड के कई हिस्सों में मानसून ने अपना रौद्र रूप दिखाया। 16 अगस्त 2011 को प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, देहरादून और मसूरी में पिछले 36 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह पटरी से उतार दिया। राजधानी देहरादून में लगातार बारिश के कारण क्लेमेंट टाउन जैसे निचले इलाकों में पानी भर गया, जिससे लोगों को अपने घरों से कीमती सामान निकालने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
सड़क संपर्क की बात करें तो मसूरी-यमुनोत्री राजमार्ग, यमुना ब्रिज-विकासनगर रोड और अगलाड़ पुल मार्ग भूस्खलन के कारण बंद हो गए थे। लोक निर्माण विभाग (PWD) के कर्मचारी और मशीनरी मलबे को साफ करने के लिए दिन-रात जुटे रहे। बारिश इतनी तेज थी कि थत्यूड़ के पास बहने वाले नालों के उफान में कई पनचक्कियाँ (Watermills) बह गईं। पर्यटकों के लिए भी यह समय मुश्किल भरा रहा, क्योंकि खराब मौसम और बंद रास्तों की वजह से वे अपने होटलों में ही फंसे रहने को मजबूर थे। इस प्राकृतिक आपदा ने पहाड़ों की पारिस्थितिक संवेदनशीलता और ड्रेनेज सिस्टम की कमियों को एक बार फिर उजागर कर दिया था।





